
मुम्बई का प्रसिद्ध ताजमहल होटल मुम्बई की शान माना जाता है.
जमशेदजी टाटा द्वारा निर्मित इस होटल को पाकिस्तानी आतंकवादियों ने ध्वस्त करना चाहा था, लेकिन वे कामयाब ना हो सके और जमशेदजी का सपना फिर से अपनी पुरानी रौनक में लौट रहा है.
ताजमहल होटल के निर्माण के पीछे एक रोचक कहानी छुपी हुई है. सिनेमा के जनक लुमायर भाईयों ने अपनी खोज के छ: महीनों बाद अपनी पहली फिल्म का शो मुम्बई में प्रदर्शित किया था. वैसे तो वे ऑस्ट्रेलिया जा रहे थे, लेकिन बीच रास्ते में उन्होने मुम्बई में भी के शो रखने की बात सोची.
7 जुलाई 1896 को उन्होने मुम्बई की आलिशान वोटसन होटल में अपनी 6 अलग अलग फिल्मों के शो आयोजित किए. इन शो को देखने के लिए मात्र ब्रिटिश लोग आए थे, क्योंकि वोटसन होटल के बाहर एक तख्ती लगी रहती थी, जिस पर लिखा होता था- भारतीय और कुत्ते होटल में नहीं आ सकते हैं.
टाटा समूह के जमशेदजी टाटा भी लुमायर भाईयों की फिल्में देखना चाहते थे, लेकिन उन्हें वोटसन होटल में प्रवेश नहीं मिला. रंगभेद की इस घृणित नीति के खिलाफ उन्होनें आवाज उठाई और दो साल बाद वोटसन होटल की आभा को धूमिल कर दे ऐसी भव्य ताजमहल होटल का निर्माण शुरू करवाया.
1903 में यह अति सुंदर होटल बनकर तैयार हो गई. कुछ समय तक इस होटल के दरवाजे पर एक तख्ती भी लटकती थी जिसपर लिखा होता था – ब्रिटिश और बिल्लियाँ अंदर नहीं आ सकती.


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