Saturday, 21 February 2009

सामाजिक संबंध क्यों और कैसे बनते हैं? इंटरनेट से मिलता है जवाब


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हम इंसानों का एक नैसर्गिक गुण होता है सामाजिक संबंध बनाना. हम आसपास के लोगों, पडोसियों आदि के साथ मित्रतापूर्ण संबंध बना लेते हैं. लेकिन इसके पीछे की वजह और गणित क्या है?

अमेरिका की नोर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय के कुछ संशोधकों जैसे कि नोशिर कोंट्राक्टर, जेन एस. और विलीयम व्हाइट ने इसका जवाब ढुंढने के लिए इंटरनेट का सहारा लिया. उन्होनें सोश्यल नेटवर्किंग संजाल सेकंड लाइफ के माध्यम से यह समझना चाहा कि लोग लोग अन्य लोगों को किस प्रकार से मित्र बनाते हैं. क्या वे अपने मित्रों के मित्रों को ही पसंद करते हैं? वे अपने समूह में शामिल हुए नए लोगों के साथ कितनी तेजी से मित्रतापूर्ण संबंध बनाते हैं? आदि.

लेकिन सेकंड लाइफ का अध्ययन ही क्यों? इसका जवाब यह है कि सेकंड लाइफ अन्य सोश्यल नेटवर्किंग साइटों से अलग है. यह एक वर्चुअल लाइफ सिमुलेशन हैं जहाँ लोग आपस मे ठीक उसी प्रकार से मिलते हैं जैसे कि वास्तविक जिंदगी में मिलते हैं. दूसरी वजह है इस साइट का बडा डेटाबेस – इस साइट के 15 मिलीयन प्रयोक्ता हैं. और तीसरी वजह यह कि इस नेटवर्क पर किशोरों और वयस्कों के लिए अलग अलग दुनिया बनाई गई है, इससे इन दोनों आयुवर्गों के लोगों के व्यवहार की जाँच करने मे आसानी रहती है.

अपनी शोध के नतीजे बताते हुए इन संशोधकों ने कहा कि किशोर अनजान लोगों की बजाए अपने मित्रो और उनके मित्रों को ही अपना मित्र बनाते हैं तथा उनसे बातचीत करते हैं. इससे यह आम धारणा गलत साबित होती है कि बच्चे इंटरनेट पर अनजान लोगों से अधिक मेलजोल स्थापित करते है.

इस शोध के अनुसार मनुष्य सुरक्षा पाने के लिए तथा अपने फायदे को देखते हुए मित्रतापूर्ण सबंध स्थापित करता है. लेकिन मित्र बनाते समय वह अपने मित्रों पर अधिक विश्वास स्थापित कर पाता है और अपने मित्र के मित्रों को अपना मित्र बनाने में उसे अधिक आसानी महसूस होती है.

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